पूजा करते समय पीरियड आ जाए तो क्या करें? - pooja karate samay peeriyad aa jae to kya karen?

यह एक बहुत ही कॉमन प्राब्लम है जिसका सामना हर रोज लगभग 3 में से 2 लड़कियों को करना पड़ता है। दिनभर भूखे रहकर, सारे नियमों का पालन करने के बाद शाम के वक्त या पूजा के समय माहवारी आ जाने से मूड का बिगड़ जाना लाजिमी है, लेकिन आज हम बताने जा रहे हैं कि ऐसे में आपको व्रत भंग करने की कोई जरुरत नहीं है।

 

जी हां, मासिक धर्म के समय महिलाओं को पूजा-पाठ इत्यादि करने से मना किया जाता है। पहले के जमाने में तो नियम और भी कड़े होते थे। उस जमाने में पीरियड्स के समय महिलाएं जमीन पर चटाई बिछाकर सोती थी, किसी कार्य में भाग नहीं लेती थी, यहां तक कि रसोई घर में भी उन्हें जाने से मना किया जाता था। हालांकि बदलते जमाने के साथ लोगों की सोच भी बदली है। पहले की अपेक्षा समाज में इन चीजों को लेकर जागरुकता फैली है।

 

ऐसे में अगर व्रत के बीच पीरियड्स आ जाए तो उपवास तोड़ने की कोई जरुरत नहीं है। आप बाकियों से दूरी बनाकर सभी नियमों का पालन कर सकती हैं। पूजा-पाठ से दूरी बनाकर अन्य नियमों का ठीक वैसे ही पालन करें जैसे कि सामान्य दिनों में करती हैं। इससे भी आपको व्रत का उतना ही फल मिलेगा। यह प्रकृति का चक्र है, इसमें इंसान का कोई हाथ नहीं और न ही इसमें कुछ गलत है।

 

किसी भी कार्य या ईश्वर के प्रति आस्था इंसान के मन और विचारों से जुड़ा हुआ है, शरीर तो महज एक जरिया है। इसीलिए पूरी मन और श्रद्धा से माहवारी के दिनों में भी आप अपनी परंपराओं को बरकरार रखकर सभी नियम कानूनों का पालन कर सकती हैं।

पीरियडके पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं – मासिक धर्म में व्रत कैसे करें – महिलाओं में पीरियड आना एक अच्छी बात हैं. अगर सही समय पर महिला को पीरियड आ जाए तो यह महिला के लिए शारीरिक रूप से अच्छा माना जाता हैं. लेकिन हिंदू परंपरा के अनुसार पीरियड के दौरान महिला को पूजा करने की मनाई होती हैं. ऐसे समय पर महिलाएं दुविधा में फंस जाती हैं. और वह पूजा नहीं कर पाती हैं. पीरियड आने के बाद महिलाएं कितने दिन तक पूजा नहीं कर सकती हैं. यह जानकारी पाने के लिए हमारा यह आर्टिकल अंत तक जरुर पढ़े.

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने वाले है की पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं तथा माहवारी के कितने दिन बाद पूजा करना चाहिए. इसके अलावा इस टॉपिक से जुडी अन्य और भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले हैं.

तो आइये हम आपको इस बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं.

अनुक्रम

  • पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं
  • माहवारी के कितने दिन बाद पूजा करना चाहिए
  • पीरियड में पूजा करने से क्या होता है
  • मासिक धर्म में व्रत कैसे करें                                       
  • पीरियड्स कितने दिन होना चाहिए
  • निष्कर्ष

पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं

जी हां, पीरियड के पांचवे दिन महिलाएं बीना संकोच के निश्चित रूप से पूजा कर सकती हैं. ऐसा माना जाता है की महिलाएं पीरियड आने के चार दिन बाद पांचवे दिन पूजा कर सकती हैं. पीरियड आने के चार दिन बाद पांचवे दिन अगर महिलाएं पूजा करती हैं. तो तो उनकी पूजा सफल मानी जाती हैं.

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माहवारी के कितने दिन बाद पूजा करना चाहिए

माहवारी आने के चार दिन बाद महिलाएं पूजा कर सकती हैं. इन चार दिनों के भीतर महिलाओं को पूर्ण रूप से नियम पालना होता हैं. इन चार दिन के दौरान महिलाओं को पूजा करने से बचना चाहिए. साथ-साथ इन चार दिन के भीतर महिलाएं भगवान के लिए भोग तथा प्रसाद आदि भी तैयार नहीं कर सकते हैं.

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पीरियड में पूजा करने से क्या होता है

वैसे तो पीरियड के दौरान पूजा करने से किसी को कुछ भी नहीं होता हैं. अगर महिलाएं चाहे तो पीरियड के दौरान भी स्नान आदि करने के बाद शुद्ध होकर पूजा कर सकती हैं. लेकिन पीरियड के दौरान पूजा नहीं करने की परंपरा पुराने समय से ही चली आ रही हैं. इसलिए आज भी महिलाएं इस नियम का पालन कर रही हैं.

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प्राचीन समय में पूजा आदि करने में बड़े-बड़े मंत्रों का उच्चारण करना होता था. तथा पूजा विधि लंबे समय तक चलती थी. ऐसे में पीरियड के दौरान महिलाएं लंबी पूजा और मंत्र उच्चारण करने से थक जाती थी. इसलिए उनको पूजा से दूर रखा जाता था. यही परंपरा आज भी चल रही हैं. इसलिए आज भी महिलाएं पीरियड के दौरान पूजा करने से बचती हैं.

मासिक धर्म में व्रत कैसे करें                                       

मासिक धर्म कब आएगा इसके बारे में महिला को पहले से पता होता हैं. क्योंकि उनका मासिक चक्र 22 से 28 दिन में फिर से रिपीट होता हैं. अगर आपको पता चलता है की व्रत के दिनों में ही मासिक आने की संभावना हैं. तो आपको व्रत करने का संकल्प नहीं लेना चाहिए. और हो सके तो मासिक धर्म में व्रत करने से बचना चाहिए.

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लेकिन कुछ महिलाएं व्रत के लिए संकल्प ले चुकी होती है. और उनके लिए व्रत करना जरूरी होता हैं. तो वह व्रत कर सकती है. लेकिन व्रत के दौरान आपको पूजा आदि नहीं करनी हैं. पूजा आदि घर के किसी अन्य सदस्य से करवाए. इसके अलावा भगवान की मूर्ति तथा प्रसाद को स्पर्श करने से भी बचना चाहिए. आप अपना व्रत भूखे रहकर या एक समय खाना खाकर या फलाहार करके पूर्ण कर सकती हैं.

पीरियड्स कितने दिन होना चाहिए

आमतौर पर पीरियड्स पांच दिन होना चाहिए. लेकिन कुछ मामलों में पीरियड्स दो दिन या सात दिन तक भी रह सकता हैं.

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निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताया है की पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं तथा माहवारी के कितने दिन बाद पूजा करना चाहिए. इसके अलावा इस टॉपिक से जुडी अन्य और भी जानकारी प्रदान की हैं.

हम उम्मीद करते है की आज का हमारा यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा. अगर उपयोगी साबित हुआ हैं. तो आगे जरुर शेयर करे. ताकि अन्य लोगो तक भी यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुंच सके.

दोस्तों म आशा करते है की आपको हमारा यह पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं / मासिक धर्म में व्रत कैसे करें आर्टिकल अच्छा लगा होगा. धन्यवाद

व्रत के दौरान पीरियड आ जाए तो क्या करें?

अगर व्रत या पूजा-पाठ के दौरान पीरियड्स आ जाएं तो ऐसे में महिलाओं को अपना व्रत पूरा करना चाहिए। इस दौरान मानसिक रूप से भगवान की आस्था करनी चाहिए। पूजा-पाठ के दौरान दूर बैठकर किसी अन्य व्यक्ति से पूजा करवा सकती हैं। इस दौरान पूजा-पाठ के सामान को नहीं छूना चाहिए।

क्या हम पीरियड्स के दौरान भगवान की पूजा कर सकते हैं?

Puja Path Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कई तरह के नियमों का पालन करने का विधान है. ऐसे में महिलाओं को भी बहुत से नियमों का ध्यान रखना जरूरी होता है. पीरियड्स के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ करने, मंदिर जाने आदि की मनाही होती है.

पीरियड्स में मंदिर जाने से क्या होता है?

ऋतु स्नान से पहले मानते है अपवित्र ऐसी ही एक मान्यता महिलाओं से जुड़ी हुई है, भारत में जब लड़की अपने पीरियड्स में होती है तो उसे अपवित्र माना जाता है और इस दौरान उन्हें मंदिरों में जाने की भी इजाजत नहीं दी जाती, क्योंकि लोगों का यह मानना है कि उस समय अगर महिला मंदिर जाएगी तो मंदिर भी अपवित्र हो जाएगा.

पीरियड में कितने दिन पूजा नहीं करनी चाहिए?

आमतौर पर यह माना गया है कि जब महिलाओं को मासिक धर्म होता है तो मासिक धर्म के 4 दिन बाद महिलाओं को पूजा करनी चाहिए, ताकि उनकी पूजा में बिना व्यवधान के वह सफल हो सके, इस दौरान आपको पूजा में बनने वाले प्रसाद या पूजन सामग्री को तैयार करने से भी दूर रहना चाहिए

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