क्या निराश हुआ जाए Class 12 - kya niraash hua jae chlass 12

शब्दार्थ

  • समाचार – खबर
  • दृष्टि – नज़र
  • भीरू –  कायर , डरपोक
  • दोषोद्घाटन – कमियों  को दिखाना
  • अवांछित – अनचाहा ,जिसकी इच्छा न की गई हो
  • गरिमा – महिमा, महत्व
  • परिचालक – कंडक्टर
  • प्रतिष्ठा – मान–मर्यादा , सम्मान

प्रश्न 1: लोगों ने बस चालक से माफी क्यों माँगी ?

उत्तर: जब बस एक निर्जन सुनसान स्थान पर रुक गई तो सभी यात्री घबरा गए । परिचालक बस से नीचे उतरा और एक साइकिल लेकर कहीं चला  गया ।लोगों को संदेह हो गया कि उनके साथ कोई दुर्घटना होने वाली है । किसी ने कहा,” इस स्थान पर डकैती होती है।  दो दिन पहले इसी तरह एक बस को लूटा गया था।“  सभी के मन में डाकू का डर समा गया । कुछ नौजवानों ने चालक को पकड़कर मारने की योजना बनाई। क्योंकि उनका मानना था कि चालक ने ही परिचालक को डाकुओं के पास सूचना देने के लिए भेजा है । लेकिन जब परिचालक डेढ़‌- दो घंटे बाद एक खाली बस लेकर आया और सभी यात्रियों से कहा कि, “आप लोग दूसरे बस में बैठ जाइए, क्योंकि यह बस चलने की स्थिति में नहीं है । तब सभी यात्रियों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन लोगों ने चालक से माफी माँगी।

प्रश्न 2: आजकल जीवन के महान मूल्यों के प्रति लोगों की आस्था क्यों डोलने लगी है ?

उत्तर: आजकल ईमानदार और सच्चे व्यक्ति को लोग मूर्ख समझते हैं । ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है, लोग  ऐसा सोचते हैं कि केवल कायर और बेबस लोग ही सच्चाई की राह पर चलते हैं । इसलिए ऐसी स्थिति में जीवन के महान मूल्यों के प्रति लोगों की आस्था डोलने लगी है ।

प्रश्न 3: “दोषों का  पर्दाफाश करना बुरी बात नहीं है।” पंक्ति का भाव(आशय) स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: “दोषों का पर्दाफाश करना बुरी बात नहीं है।“  इस वाक्य का आशय यह है कि, लोग दूसरों के दोषों तथा  उनकी कमियों को उजागर करके या उद्घाटित करके उससे मजा लेते हैं और उनकी गलतियों को सभी के समक्ष प्रस्तुत करने को एकमात्र अपना कर्तव्य समझ लेते हैं । किसी की गलतियों में मजा लेना बुरी बात है, लेकिन उससे भी बुरी बात यह है कि जब हम किसी की अच्छाई को उसके अच्छे स्वभाव को या उसके अच्छे  कामों को लोगों के सामने उद्घाटित अर्थात् प्रस्तुत  नहीं करते ।

Kya Nirash Hua Jaaye Questions & Answers क्या निराश हुआ जाए प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 4: पाठ में रवींद्रनाथ टैगोर ने क्या प्रार्थना की है और क्यों? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर: पाठ में कवि रवींद्रनाथ  टैगोर ने अपने प्रार्थना गीत में भगवान से प्रार्थना की है कि संसार में केवल नुकसान ही उठाना पड़े, धोखा ही खाना पड़े तो ऐसे अवसरों पर भी हे प्रभो ! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मैं तुम्हारे ऊपर संदेह न कर सकूँ । अर्थात् वे ईश्वर पर पूर्ण विश्वास करना चाहते हैं। हमेशा सकारात्मक रूप से सोचना चाहते हैं; क्योंकि उनका मानना है कि ईश्वर के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं है। बुरे काम का परिणाम अंततः बुरा ही होता है । ठीक ऐसे ही जैसे बबूल के वृक्ष से आम का फल नहीं पाया जा सकता ।

प्रश्न 5: एक बार एक सज्जन ने लेखक से क्या कहा?

उत्तर: एक बार एक सज्जन ने लेखक से कहा था कि इस समय सुखी व्यक्ति वही है जो कुछ नहीं करता। कोई कुछ भी करेगा लोग उसमें दोष खोजने लगेंगे। उसके सारे गुण भुला दिए जाएँगे और दोषों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाएगा।

प्रश्न 6: ‘क्या निराश हुआ जाए’ शीर्षक की सार्थकता पर अपने तर्क देते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तर: लेखक ने यह शीर्षक उचित रखा है। आजकल हम अराजकता की जो घटनाएँ अपने आसपास घटते देखते रहते हैं, जिससे हमारे मन में निराशा भर जाती है। लेकिन लेखक ने हमें उस समय समाज के मानवीय गुणों से भरे लोगों को और उनके कार्यों को याद करने को कहा है जिससे हम निराश न हो। टिकट बाबू द्वारा लेखक को अधिक दिया हुआ पैसा लौटना भी यह दर्शाता है कि अभी भी ज़िंदगी में सच्चाई और उम्मीद बरकरार है।अतः हमें निराश होने की ज़रुरत नहीं है तथा यह शीर्षक की सार्थकता को हदतक पूरा करती है।

तो ये थे Kya Nirash Hua Jaaye Questions & Answers क्या निराश हुआ जाए प्रश्न और उत्तर।

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क्या निराश हुआ जाए पाठ का सारांश?

लेखक समाचार-पत्रों को देखता है तो उसमें ठगी, डकैती, तस्करी, चोरी और भ्रष्टाचार के समाचारों की बहुलता होती है, जिसे देखकर उसका मन दुखी हो जाता है। इनमें एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप किया जाता है। इसे देखकर तो यही लगता है कि देश में कोई ईमानदार रह ही नहीं गया है। ऐसे में हर व्यक्ति गुणी कम, दोषी अधिक दिखता है।

क्या निराश हुआ जाए पाठ से हमें क्या सीख मिलती है?

Answer: लेखक के अनुसार, दोषों का पर्दाफ़ाश करना बुरी बात नहीं होती है। परन्तु, इसमें बुराई तब सम्मिलित हो जाती है जब हम किसी के आचरण के गलत पक्ष को उद्घाटित करके उसमें रस लेते है।

क्या निराश हुआ जाए अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर?

उत्तर: दोषों का पर्दाफाश करना समाज की आवश्यकता है, परन्तु जब किसी के आचरण के गलत पक्ष का उद्घाटन करके उसमें रस लिया जाए, तो यह अनुचित है। बुराई में रस लेना तो बुरा है ही, अच्छाई में उतना ही रस लेकर उजागर न करना और बुरी बात है। दोषों के पर्दाफाश में ध्यान इस बात का रखना चाहिए कि हमारी मानसिकता संतुलित हो।

क्यों निराश हुआ जाए?

लेखक ने इस लेख का शीर्षक 'क्या निराश हुआ जाए' उचित रखा है। आजकल हम अराजकता की जो घटनाऍ अपने आसपास घटते देखते रहते हैं। जिससे हमारे मन में निराशा भर जाती है। लेकिन लेखक हमें उस समय समाज के मानवीय गुणों से भरे लोगों को और उनके कार्यों को याद करने कहा हैं जिससे हम निराश न हो।

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